
भाटापारा–टोनाटार में हुए हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ कलश यात्रा, जय श्रीराम की जयकारे, रामायण पाठ, कीर्तन के साथ द्वीप प्रज्जवन से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मदकू द्वीप रामाश्रय आश्रम से आए महंत श्री रामरूप दास महात्यागी महराज जी ने सम्मेलन में उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए हिंदू समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था को पूर्व में समाज के कार्य की व्यवस्था के रूप में बताते हुए प्रशासनिक व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताए कि जिस प्रकार से प्रथम, द्वितीय तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी होते है जो एक निश्चित योग्यता और प्रशासनिक क्षमता को प्राप्त कर नीचे से ऊपर की श्रेणी में पदोन्नत होते हैं वैसे ही प्राचीन समय में भारत की वर्ण व्यवस्था को होना बताया है जिसमें ऊंच नीच का कोई स्थान नहीं था इसके लिए महंत जी ने कंधे से ऊंची छाती नहीं होती और धर्म से ऊंची जाती नहीं होती जैसे शब्दों का उद्धरण प्रस्तुत करते हुए भगवान श्री रामचंद्र जी क्षत्रिय वंश में जन्म लेने के बाद भी किस प्रकार से निषाद राज से मिले, वन में निवास करने वाली शबरी से मिले सबको अपने गले लगाकर समाज को जोड़ने का कार्य किए।
छत्तीसगढ़ में नवधा भक्ति का उदाहरण शबरी की भक्ति से होना बताए और राम की भक्ति को राष्ट्र की भक्ति बताते हुए
महंत जी समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किए और हिंदू समाज का एक जूट नहीं होने पर बांग्लादेश में कैसे दीपूदास जैसे अनेकों हिंदुओं का बिना कोई अपराध के निर्मम हत्या हो जाना बताए। कार्यक्रम के अंत भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
हिंदू सम्मेलन में संयोजक चंद्रप्रकाश साहू, ग्राम के सरपंच विष्णु कौशले जी,उपसरपंच कुलेश्वर वर्मा जी पंचगण, महाबल बघेल जी, डब्लू ठाकुर जी, टी आर वर्मा जी, रामायण पाठ करने वाले नरानतक यादव जी, भारत माता वाहिनी की माताये, लक्ष्मी वैष्णव, लक्मी वर्मा, सरस्वती वर्मा, रमा ध्रुव चिंतामणि जी, राहुल जी एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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